सतगुरु दी नगरी, अरशां तों उतरी, नकशा वी खूब बनाया है,सतगुरु दाता मेरा नगरी दा राजा, जिसने ऐ खेड़ रचाया है,नकशा वी खूब बनाया हैं--२,

                     Jai Sachidanand Ji
 Sri Satguru Bhajan Channel 🌹 Naman Gurumukh Ji 🌹

                भजन

""हर वेले शुक्र ते शुकराना करा मैं,
तेरी बंदगी दा दीवाना रहवाँ मैं,
हौवे मेंहर ते चरनी लगा रहवाँ मैं,
पल पल याद विच मस्ताना रहवाँ मैं ,,,,
❤❤🙏🙏❤❤❤🙏🙏❤❤

टेक :- सतगुरु दी नगरी, अरशां तों उतरी, नकशा वी खूब बनाया है,सतगुरु दाता मेरा नगरी दा राजा, जिसने ऐ खेड़ रचाया है,नकशा वी खूब बनाया हैं--२,

1. प्रेम-प्यार दी नगरी अन्दर, प्रेमी आन्दें ने,-२,
सेवा करदे,दर्शन पान्दे,भाग मनान्दें ने,-२,
सतगुरु जी तेरे प्रेम दीवाने,मिलके गान्दे ने,
नगरी तेरी दी शोभा, जाये ना बरनी,
जिसनूँ तू आप सजाया हैं,--नकशा वी--२,

2. पकीयां-२ चौड़ियाँ सड़कां,इस नगरी अन्दर,-२,
सरोवर दे विचकार बनाया,सोहणा हरिमन्दर-२,
नीं तों लेकै चोटी तक,लाया है संगमरमर,
दोवें समाधियाँ कोलों,शोभा जे देंदा,
ज्यों असमनों चन चुराया हैं,--नकशा वी--२,

3.अमृत वेले दी शोभा, हरिमन्दर दी न्यारी ऐ,-२,
जित्थें मेरे सतगुरु आयें,करके कार सवारी ऐ-२
फेर आरती-पूजा गाकें संगत,जावे बलहारी ऐ,
सदके मैं जावाँ अपने,सतगुरां तों,
जिन्हाँ ने एह दस्तूर चलाया है,--नकशा वी--२,

4. तरहाँ-२ दें फलाँ दा भन्ड़ार जित्थें है,-२,
तोता-कोयल-मोरां दी,किलकार जित्थे है,-२,
फुलाँ उते भंवरा दी गुन्जार जित्थे है,
कई तरहाँ उत्थें वगदे फव्वारे,
ओहयो मोती बाग कहाया हैं,--नकशा वी--२,

5. आनन्दपुर दी धरती दे तां,भाग सवाये ने,-२,
जित्थें मेरे सतगुरु जी ने,डेरे लाये नें,-२,
संगतां दी खातिर इत्थे,कई भवन बनाऐ ने,
'दासनदासाँ' लई सतगुरु मेरे ने,
इस धरती ते स्वर्ग बनाया हैं,--नकशा वी--२,

🎊🎊🎊🎊बोलो जयकारा 🎊🎊🎊🎊🎊
🎊🎊बोल मेरे श्री गुरुमहाराज की जय🎊🎊
🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊🎊
तर्ज--नगरी नगरी द्वारें द्वारें

🌹श्री सतगुरु देवाय नमः🌹
सभी प्यारें गुरुमुखों कों
🌹🙏🏻सप्रेम जय गुरां दी जय सचिदानंद जी🌹🙏🏻खुश रहिये, नाम जपिये🌹

Comments

Popular posts from this blog

टेक :— मुझें इतना प्यारा गुरु मिला,गुरु का, सोहणां दरबार मिला-२,

टेक :– तुम हमारे थे प्रभु जी, तुम हमारे हो..तुम हमारे ही रहोगे,ओ मेरे प्रीतम -२,

Sri Sarup banaya hai Sri darshan didar 🙏🙏