Sri Leela

                       Jai Sachidanand Ji
      
 Sri Leela Chathurath Padshi Gurumaharaji ki
Date - 02/ June /2022 , Thursday

🙏🙏  बोलो जयकारा बोलो मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय  🙏🙏

यह लीला श्री संत नगर के एक महात्मा जी ने हमको सुनायी थी की श्री चतुर्थ पादशाही जी का जमाना था एक भगत था जो श्री दरबार मे आने से पहले श्री कृषण जी का अनन्य भक्त था उसकी इतनी कमाई थी की जूब वो ध्यान मे बेठता था तो उसे श्री कृषण जी के दर्शन होते थे वो उनसे बाते भी किया करता था एक दिन ध्यान मे उसको श्री कृषण जी ने फरमाया की तुझे चोरासी भोगनी पड़ेगी क्योंकि तू सद्गुरु की शरण मे नहीं गया है और न ही तूने नाम दीक्षा ली हुई है | तब वो भगत भगवान से कहता है की मुझे गुरु बनाने की क्या जरूरत जब आप मुझे दर्शन देते हो और इस संसार मे कितने ही गुरु है मैं किनकी शरण मे जाऊ इस पर भगवान ने फरमाया की भले तुझे मेरे दर्शन होते है मगर इस संसार मे यह नियम है की बिना सद्गुरु की शरण ग्रहण किये बिना कोई भी भव से पर नहीं हो सकता और इस समय कलियुग मे मैं खुद श्री परामहँसो के रूप मे श्री आनंदपुर धाम मे आया हुआ हु तू  वहा जा | वो भगत जी बताते थे की जब श्री आनंदपुर मे श्री आरती पूजा करते थे तो श्री गुरु महाराज जी के अंदर स्वयं भगवान श्री कृषण जी के दर्शन हुआ करते थे और कई बार तो उसके साथ खड़े होकर श्री कृषण जी खुद भी  श्री आरती पूजा किया करते थे  उस भगत को भगवान अपने दोनों ही रूप दिखाते थे की जो सामने विराजमान है वो इस समय का हमारा सद्गुरु रूप है और हम खुद भी वर्तमान रूप की श्री आरती पूजा इसलिए करते है की सद्गुरु रूप मे आए बिना हम और किसी भी रूप मे आये चाहे श्री राम रूप हो  या श्री कृषण रूप हम जीव के पिछले सारे कर्म नहीं काट सकते इसलिए यह रूप हमारे लिए भी पूज्य है | एक बार गोपा अष्टमी के दिन उन भगत जी की इच्छा गऊ पूजा करने की हुई इसके लिए उन्होंने भगवान का ध्यान लगाया की वह गऊ पूजा के लिए क्या-क्या करे तो उसने ध्यान मे देखा की भगवान ने सिर पर एक टोकरा उठाया हुआ है उसमे कोई सेब जैसा एक फल रखा है ये दिखाकर भगवान चले जाते है फिर आते हो तो इस बार उनके टोकरे  मे इतने अनंत फल होते है कि वो गिने नहीं जा सकते | वो भगत भगवान से इस रहस्य को समझाने क लिए विनती करता है तो भगवान फरमाते है की गऊ पूजा का मैं  एक फल देता हु और गुरु पूजा का अनंत फल देता हु जिसको गिना नहीं जा सकता तब उस भगत ने भगवान से क्षमा मांगी की आज मैं  श्री गुरु महाराज जी की  श्री आरती पूजा कीये बिना गऊ पूजा करने की सोच रहा था |
तो प्रेमियों कितने धन्यभाग है हमारे की हमे स्वयं कुल मालिक की चरण शरण मिली है अब हमारा भी फर्ज बन जाता है की जैसे जैसे श्री आज्ञा होती है वैसे वैसे ही  हम भगती करते जाए और श्री प्रशंता पाए |
  🙏🙏  बोलो जयकारा बोलो मेरे श्री गुरु महाराज जी की जय  🙏🙏

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