Vachan
Jai Sachidanand Ji
*सतगुरु हमें समझाते है कि, यदि दूध के गिलास को समुन्दर में डाल दिया जाए तो दूध का पता ही नही चलेगा कहाँ गया और यदि उसी दूध को थोड़ा गर्म करके जाग (खट्टा) लगाकर एकांत में कुछ देर के लिए रख दें तो दही बन जाता है उसी का मंथन करके मक्खन निकलता है !अब यदि उस मक्खन को समुन्दर में डालो तो वो समुन्दर में बह नही जाएगा बल्कि ऊपर ही तैरेगा !इस में यही समझाया है कि हम उस दूध के समान है और ये संसार समुन्दर के समान !अब फैसला हमारा है कि हमने दूध बनकर संसार रूपी समुन्दर में बह जाना है या प्रभु नाम का सिमरन करके, अपना मंथन करके मक्खन बनकर तैर कर समुन्दर रूपी संसार के भवसागर को पार करना है !*
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Bolo Jai kara bol mere Sri Gurumaharaji ki Jai🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
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