टेक - श्री आरती पूजा होती हैं जिस घर में,मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

तारन हार भी तू . .पालन हार भी तू . .
जीवन सागर मझधार भी तू ,
पतवार भी तू , .खैवन हार भी तू ,
मैं क्या हुँ .? .? .?कुछ भी नहीं
''सतगुरु '' मेरा सब कुछ तू ही तू !..🌹🌹

टेक - श्री आरती पूजा होती हैं जिस घर में,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,
सच्चे नाम की ज्योति जलती हैं जिस घर में,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

1. जो भी नियम से आरती करते हैं, 
सतगुरु झोली उनकी भरते हैं-२,
ऐसी झोली भरते सतगुरु, थौड़ कभी ना आये,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

2. नाम देता सदा हैं ठन्ड़ी हवा, 
नाम सारे दुखों की हैं एक दवा-२,
जोभी नाम ये जपता हैं,सदा ही खुश वो रहता हैं,
 ‎मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

3.सतगुरु कितनी ऊँची शक्ति हैं, 
जो भी आये चढ़ती मस्ती हैं-२,
ऐसी मस्ती चढ़ जाये फिर,होश कभी ना आये,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

4. सतगुरु जहाँ जहाँ चरणं छुआते हैं,
वो भवसागर पार लगाते हैं-२,
भवसागर से पार करायें, और जन्म ना आये,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

5. इनकी चौखट पर सर रख दीजिए,
इनसे प्रेम प्याला पी लीजिए-२,
नाम प्याला ऐसा जिससे, प्रेमी मस्त हो जायें,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

6.जो प्रेम से भोग लगाते हैं,
सतगुरु प्यारं से उनकों खातें हैं-२,
ऐसा भोग लगायें मेरे सतगुरु, सब अमृत हो जायें,
मेरे सतगुरु रोज आते वहाँ-२,

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बोलो जयकारा
बोल मेरे श्री गुरुमहाराज जी की जय
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